*अखिल भारतीय साहित्य परिषद लखनऊ, दक्षिण*
दिनांक 25.01.2026 को अभिनंदन समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था *संघ साहित्य समग्र चिंतन प्रवाह*। संगोष्ठी में दक्षिण इकाई की अध्यक्ष *प्रोफेसर डॉ नीतू शर्मा* द्वारा संचालन किया गया। प्रोफेसर शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं श्रीमती संगीता पाल द्वारा सरस्वती वंदना गान एवं दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई इसके पश्चात् श्री राजीव वत्सल द्वारा परिषद गीत प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात् मंचस्थ विद्वजनों को पुष्पमाला, अंगवस्त्र एवं पौधा देकर अभिवादन किया गया।
इसके बाद डॉ बलजीत श्रीवास्तव ने संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए अपने वक्तव्य में संघ के सौ वर्ष पूर्ण करने पर हर्ष जताया तथा संघ साहित्य पर रचित १५०० पुस्तकों की सूची पर भी प्रकाश डाला। अपने वक्तव्य में डॉ बलजीत श्रीवास्तव ने हर विधा में संघ साहित्य की उपलब्धता पर प्रकाश डाला।
इसके बाद दक्षिण इकाई की डॉ. मधुलिका चौधरी ने कार्यकम में अपने वक्तव्य में बताया किस तरह पाश्चात्य संस्कृति के चकाचौंध में पड़कर भारतीय संस्कृति को छोड़ते जा रहे हैं और राष्ट्र के पुनर्निमाण पर बल देते हुए प्रकृति और विज्ञान को जोड़ने की बात कही।
तत्पश्चात प्रांत अध्यक्ष श्री विजय त्रिपाठी जी ने संघ के इतिहास के बारे में बताया। तथा आजादी की अलख जगाने वाले संघ के गीतों के बारे में विस्तृत चर्चा की।
इसके बाद कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामंत्री का अभिनंदन था जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ . सुशील चंद्र त्रिवेदी जी और मुख्य अतिथि डॉ पवन पुत्र बादल जी का अभिनंदन प्रतीक चिह्न,अंग वस्त्र और पुष्प माला पहना कर किया गया। इसके बाद डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी जी ने कार्यक्रम में अपने उदबोधन् में संघ की विचारधारा और संघ साहित्य का प्रदेय पर अपने विचार व्यक्त किये।
तत्पश्चात विशिष्ट वक्ता प्रो. हरिशंकर मिश्र जी ने संघ साहित्य समग्र चिंतन प्रवाह पर अपने विचार व्यक्त किए उन्होंने राष्ट्र के सुदृढ़ होने और राष्ट्र के विकास के मार्ग को सुदृढ़ करने की प्रेरणा दी, अहम राष्ट्र के सूक्ति को विस्तृत रूप से चर्चा की उन्होंने कहा हम राष्ट्र के हैं और राष्ट्र हमारा है, मिश्र जी ने कलिः शयानो भवति "उत्तिष्ठंस्त्रेता भवति कृतं संपद्यते चरन् " सूक्ति द्वारा चारों युग के बारे में अपने विचार रखें।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवन पुत्र बादल जी ने भारतीय परंपरा और पाश्चात्य की तुलना करते हुए इसके मूल पर ध्यान आकर्षित किया , संघ के इतिहास पर बात करते हुए उससे जुड़े लोगों के त्याग को याद किया।
अंत में डॉ. पूनम सिंह द्वारा अध्यक्ष तथा मुख्य अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया एवं श्रीमती संगीता पाल द्वारा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत माता गीत और राष्ट्र गीत की प्रस्तुति के बाद डॉ कुमुद् पाण्डे द्वारा शांति मंत्र करते हुए कार्यक्रम की समाप्ति हुई।
कार्यक्रम में डॉ धीरेंद्र कौशल, डॉ सुरसरि तरंग मिश्र, डॉ जाह्नवी अवस्थी, श्रीमती ज्योति किरण,प्रांत प्रचार मंत्री श्री सर्वेश पाण्डे 'विभि' महानगर इकाई से अध्यक्ष श्री निर्भय नारायण गुप्त, महामंत्री डॉ ममता पंकज, श्री शशि कांत द्विवेदी, तथा भारी संख्या में शोधार्थी व छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नियमन होना चाहिए : अनंत विजय
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा रविवार को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में 'ओटीटी प्लेटफॉर्म की सामग्री का नियमन' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए 'ओवर द टॉप का मायाजाल' पुस्तक के लेखक एवं समीक्षक अनंत विजय ने कहा कि ओवर द टॉप यानी ओटीटी पर जिस तरह की सामग्री परोसी जा रही है, इसे लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है। अच्छी बात है कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इस विषय पर परिचर्चा आयोजित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा से ज्यादा बड़ा फलक ओटीटी का हो गया है। इस माध्यम में कुछ अच्छी कहानियां दिखाई जा रही हैं, लेकिन अनेक कहानियों में प्रस्तुत भगवान का उपहास उड़ाने की प्रवृत्ति, सेना और सैनिकों की छवि खराब करने जैसे प्रसंग, गाली-गलौज, यौनिकता, नग्नता, हिंसा से भरे कंटेट चिंता का विषय है और उस पर कहीं न कहीं अंकुश लगाने की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नियमन होना चाहिए। सरकार पर इसे लेकर बहुत दबाव है और वह विचार कर रही है। हालांकि इसके लिए काफी संसाधनों की आवश्यकता होगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. कार्यालय मंत्री संजीव सिन्हा ने संस्था परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिषद् भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों की संस्था है। 1966 ई. में स्थापित इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष महान साहित्यकार जैनेंद्र कुमार थे।
परिचर्चा का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती, आरके पुरम विभाग के अध्यक्ष एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मलखान सिंह ने किया। कार्यक्रम के संयोजक मुन्ना रजक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, झारखंड प्रदेश का द्विदिवसीय प्रांतीय अधिवेशन दिनांक 27–28 दिसंबर 2025 को रांची में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में अखिल भारतीय महामंत्री आदरणीय डॉ. पवनपुत्र बादल जी की प्रेरणादायी गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रदेश के सभी चौबीसों जिलों से पधारे साहित्यप्रेमी कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। इस सफल, सुव्यवस्थित एवं प्रेरक अधिवेशन के लिए समस्त आयोजक मंडल एवं सहभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
17वां राष्ट्रीय अधिवेशन रीवा (मध्य प्रदेश )
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के १७ बे अधिवेशन का शुभारम्भ करते हुए भारत गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति आदरणीय राम नाथ कोबिन्द जी , वरिष्ठ साहित्यकार श्री विश्वास पाटिल जी , मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल जी ,आदरणीय डॉ सुशील जी , आदरणीय श्रीधर पराड़कर , श्री ऋषी जी ,भव्य शुभारम्भ .
कवि संबोधन करते हुए
प्रदर्शनी का उद्घाटन समारोह
शोभा यात्रा
सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन
"हिन्द की चादर – गुरु तेग बहादुर"
“हिन्द की चादर” के रूप में विख्यात नौवें सिख गुरु तेग बहादुर जी का यह तीन सौ पचासवाँ बलिदान–वर्ष है, जो देशभर में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। गुरु साहिब के महान् प्रेरक बलिदान की स्मृति में अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, जयपुर की ओर से विगत दिनों “पुस्तक पाठक संवाद एवं परिचर्चा” का आयोजन राजकीय महाराजा सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, चौड़ा रास्ता, जयपुर में किया गया।
डॉ. मंजीत कौर की पुस्तक “महान् प्रेरक बलिदानी– श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी” पर आयोजित इस संवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम में मुख्यवक्ता श्री मनोज कुमार, संगठन मंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, नई दिल्ली थे। लेखिका डॉ. मंजीत कौर ने पुस्तक तथा तेग बहादुर जी की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। ‘साहित्य परिक्रमा’ के सम्पादक इंदुशेखर तत्पुरुष ने बीज वक्तव्य दिया।
महाराष्ट्र प्रदेश का अभ्यास वर्ग और प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 6,7 दिसंबर 2025 को पुणे में संपन्न हुआ
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् युवा/शोधार्थी आयाम द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित शोधार्थी संवाद सत्र एवं “आत्मबोध से विश्वबोध” विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में सौ से अधिक शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। यह ज्ञानसमृद्ध आयोजन युवा शोधार्थी आयाम के प्रमुख श्री आदर्श जी के सफल संयोजन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को प्रेरणादायी, संवादप्रधान और अत्यंत प्रभावी रूप प्रदान किया।
युवा शोधार्थी आयाम लखनऊ द्वारा आयोजित पुस्तकालय दर्शन ( सेल्फी विथ पुस्तकालय )
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशीलचन्द्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ एवं मध्यप्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री मा. राजेन्द्र शुक्ल जी के मध्य पारस्परिक वैचारिक आदान-प्रदान का अत्यंत सारगर्भित, सकारात्मक एवं दूरदर्शी संवाद सम्पन्न हुआ, जिसमें समकालीन साहित्यिक दिशा-दृष्टि, सांस्कृतिक संवर्धन तथा राष्ट्रहित में किये जा रहे रचनात्मक प्रयासों पर विस्तारपूर्वक विचार किया गया।
भारतीय भाषा दिवस पर साहित्य परिषद् अवध और बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वबिद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति आचार्य राजकुमार मित्तल जी , प्रो हरीश शर्मा , प्रो रीता जी , संयुक्त महामंत्री अवध डॉ बलजीत जी , डॉ गंगवार जी सहित विद्वत जन , साहित्यकार और शोद्यार्थी उपस्थित रहे